खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने खेलो इंडिया मुहिम के अंतर्गत ‘5 मिनट और’ चैलेंज लांच किया और इस दौरान दोनों हाथों से टेबल टेनिस भी खेला. ओलंपिक खेलों की निशानेबाजी स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले राठौड़ ने साथ ही भारत के शीर्ष खिलाड़ियों और कलाकारों से बचपन की वो बातें साझा करने का अनुरोध किया जब वे अपने माता-पिता से पांच मिनट अतिरिक्त खेलने देने की मांग करते थे.
उन्होंने बचपन की यादें साझा करने के लिए विराट कोहली, साइना नेहवाल, दीपिका पादुकोण और सलमान खान को टैग किया. राठौड़ ने ट्विटर पर वीडियो संदेश में कहा, ‘याद कीजिए, जब हम बचपन में खेलते थे तो उसी समय हमारे माता-पिता हमें होमवर्क के बारे में याद दिलाते थे और हम कहते थे, ‘बस पांच मिनट और.’
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उन्होंने कहा, ‘तब हमारे लिए बोलने के लिए कोई नहीं होता था, लेकिन अब हम बोल सकते हैं. इसलिए क्यों न हम सभी देश के सभी बच्चों के लिए बोलें और कहें ‘उन्हें खेलने दीजिए', पांच मिनट और खेलो इंडिया. क्यों नहीं आप अपनी पांच मिनट और की कहानी साझा करते.’ वर्ष 2017 में राठौड़ ने वर्कआउट का वीडियो साझा कर खिलाड़ियों और फिल्मी हस्तियों को चुनौती दी थी.
खेलों इंडिया यूथ गेम्स 2019 आधिकारिक रूप से बुधवार को पुणे में शुरू होंगे. इन खेलों में चैम्पियन निशानेबाज मनु भाकेर और सौरभ चौधरी, विश्व कैडेट चैम्पियन पहलवान अंशु और सोनम, ओलंपियन एथलीट जिस्ना मैथ्यू, युवा ओलंपिक खेलों के स्वर्ण पदकधारी भारोत्तोलक जेरेमी लालिरनुगा, उभरती हुई टेनिस खिलाड़ी महक जैन और स्टार तैराक श्रीहरि नटराज भाग लेंगे. ये खिलाड़ी 18 विभिन्न स्पर्धाओं में शिरकत करेंगे जिसमें से छह टीम स्पर्धाएं हैं.
कपिल सिब्बल ने सदन में पूछा कि केन्द्र सरकार संविधान के महत्वपूर्ण अंग में संशोधन करने जा रही है लेकिन क्या उसने कोई आंकड़ा एकत्र किया है? अलग-अलग राज्यों में क्या सामाजिक स्थिति है, किस राज्य में कितने दलित, कितने कितने ओबीसी अथवा कितने आर्थिक तौर पर कमजोर लोग हैं? कपिल सिब्बल ने कहा कि देश में जब मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू किया गया तब उसे 10 साल पहले से लागू करने की तैयारी करनी पड़ी थी. लेकिन मोदी सरकार ने कैसे महज 24 घंटे के अंदर संविधान में इतने महत्वपूर्ण संशोधन और उसे लागू करने की तैयारी कर ली है?
राज्य सभा में संशोधन विधेयक पर अपना पक्ष रखते हुए सिब्बल ने पूछा कि केन्द्र सरकार को जवाब देने की जरूरत है कि उसने कैसे एक दिन के अंदर यह आंकलन कर लिया कि 8 लाख रुपये से कम आय वाला व्यक्ति गरीब है और उसे आरक्षण की जरूर है. क्या इस आंकलन के लिए सरकार के पास कोई आधार है?
जब नौकरी ही नहीं तो देंगे क्या?
वहीं अपना पक्ष रखते हुए सिब्बल ने कहा कि देश में जितनी नौकरी पैदा नहीं हो रही उससे ज्यादा नौकरी खत्म हो रही है और यह डिजिटल होते भारत की सच्चाई है. सिब्बल ने बताया कि 2001-2019 तक कुल नौकरी 7.3 फीसदी रही और इस हिसाब से सरकार द्वारा नई नौकरी प्रति वर्ष 0.4 फीसदी पैदा की गई. लिहाजा, नई नौकरी और खत्म होती पुरानी नौकरी की ऐसी स्थिति के बीच किस नौकरी को बतौर आरक्षण सरकार देने जा रही है. आंकड़ों का हवाला देते हुए सिब्बल ने कहा कि मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में 45,000 नौकरी दी. लिहाजा, क्या वह अब 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान महज 4,500 लोगों को नौकरी देने के लिए कर रहे हैं.
गरीब नहीं, सामान्य वर्ग की 99 फीसदी आबादी को मिलेगा 10 फीसदी आरक्षण!
सिब्बल ने कहा कि देश नई नौकरी नहीं पैदा कर रहा है. इस देश को आरक्षण नहीं नौकरी चाहिए और नौकरी सिर्फ विकास से आएगी. 7.3 फीसदी की दर से ग्रोथ है फिर भी नौकरी नहीं पैदा हो रही है. सीबीआई, ईडी जैसी जांच एजेंसी को सबके पीछे लगा दिया है तो निवेश कौन और कैसे लाएगा. लिहाजा, सरकार बताए कि उनके पास क्या आंकड़ा है. आखिर क्यों सरकार संविधान में ये संशोधन लेकर आई है. सरकार साफ करे कि क्या संविधान में संशोधन करने का यह तरीका सही है? सिब्बल ने कहा कि जब देश में एससी, एसटी और ओबीसी को ही आरक्षण के मुताबिक नौकरी नहीं दी जा पा रही है तो वह अब 10 फीसदी सामान्य क्ष्रेणी को नौकरी देने का ऐलान कर क्या करने जा रही है? सिब्बल ने कहा कि महज संशोधन बिल लाकर मोदी सरकार बेहद खुश हो रही है लेकिन एक सच्चाई से वह मुंह मोड़ रही है कि असली खुशी जनता को मिलनी चाहिए और क्या उनके इस बिल से जनता .
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