प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज गुजरात के दौरे पर हैं. यहां पर पीएम दांडी यात्रा की याद में बनाए गए दांडी स्मारक का लोकार्पण करेंगे. दांडी जाने से पहले प्रधानमंत्री ने सूरत में एयरपोर्ट के नए टर्मिनल की नींव रखी. इस दौरान उन्होंने एक जनसभा को भी संबोधित किया. पीएम मोदी जिस वक्त भाषण दे रहे थे उस दौरान एक हादसा भी हो गया. पीएम मोदी को कवर कर रहा एक कैमरामेन स्टैंड से नीचे गिरे गया. कैमरामैन को गिरता देख उनकी मदद के लिए कुछ लोग उनकी तरफ दौड़े. जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया है.
कैमरामैन जिस वक्त गिरे उस दौरान पीएम मोदी ने अपना भाषण भी रोक दिया. घटना के वक्त पीएम मोदी ने अपनी सुरक्षा में खड़े जवान को कुछ निर्देश दिया. बता दें कि हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जब पत्रकारों से संवाद कर रहे थे तो एक पत्रकार अचानक सीढ़ियों से नीचे गिर गया जिसके बाद खुद राहुल गांधी ने उसकी मदद की थी. दरअसल राहुल गांधी मीडिया से संवाद कर रहे थे, जब वह पैदल चलते हुए आ रहे थे तो पत्रकार उनको आगे से कवर कर रहे थे. तभी राहुल पर ध्यान होने की वजह से एक पत्रकार सीढ़ी से नीचे गिर गया. इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष दौड़कर उसके पास पहुंचे और हाथ पकड़कर उसे जमीन से उठाया. इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था.
वहीं जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पिछली सरकार ने सिर्फ 25 लाख मकान बनाए, लेकिन हमारी सरकार ने काफी कम समय में 1 करोड़ से अधिक घर बनवाए हैं. प्रधानमंत्री ने दावा किया कि मेरे जितना काम करने में पिछली सरकार को 25 साल लग जाते.
पीएम मोदी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि पूर्ण बहुमत की सरकार कड़े फैसले भी ले सकती है और बड़े फैसले भी ले सकती है. उन्होंने कहा कि पूर्ण बहुमत की सरकार जवाबदेह होती है.
पीएम मोदी ने कहा कि अगर पूर्ण बहुमत नहीं होता तो मोदी जवाब में कह देता कि मिलीजुली सरकार है. आज पूर्ण बहुमत की सरकार है इसलिए देश का नाम विश्व में आगे बढ़ रहा है.
मोदी गुजरात के नवसारी जिले में स्थित दांडी का दौरा करेंगे. जहां पर राष्ट्रीय साल्ट सत्याग्रह मेमोरियल बनाया गया है. इस स्मारक में महात्मा गांधी और उनके साथ आंदोलन करने वाले 80 अन्य सत्यग्राहियों का स्टैच्यू भी बनाया गया है.
आगे क्या करेगी कांग्रेस?
राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ के मंच से आमदनी गारंटी की बात कर अपनी चुनावी फिल्म का ट्रेलर दिखा दिया है. आगे तय है कि पार्टी अपने घोषणा पत्र में गारंटी योजना लागू करने का ऐलान करेगी और बताएगी कि यह गरीबों की दशा बदलने वाला क्रांतिकारी कदम होगा. भले आप कह लें कि पार्टियों की घोषणाओं में हवा-हवाई बातें ज्यादा होती हैं जिन पर लोग भरोसा कम और सवाल ज्यादा उठाते हैं. मगर हाल में बीते विधानसभा चुनावों का लब्बोलुआब यही है कि घोषणाएं अगर गंभीर हों, गरीब-गुरबा की संवेदना को छूने वाली हों तो लोग भरोसा करते हैं और पार्टियों को वोट मिलते हैं. लिहाजा कांग्रेस अगर गारंटी योजना घोषणा पत्र में लाती है तो इसमें कोई हैरत नहीं.
क्यों पिछड़ गई मोदी सरकार?
सवाल है कि जो ऐलान आज राहुल गांधी कर रहे हैं, उसमें मोदी सरकार कैसे पिछड़ गई? यह यक्ष प्रश्न इसलिए भी गंभीर है क्योंकि 2016-17 की आर्थिक समीक्षा में सार्वभौमिक मूलभूत आय या यूनिवर्सल बेसिक इनकम (यूबीआई) का विचार सामने रखा गया था. आज की तारीख से जोड़ें तो दो साल पहले यह अवधारणा मोदी सरकार के दिमाग में थी लेकिन इसमें कहां चूक हुई, यह विचार-विमर्श का विषय है. अब मोदी सरकार यूबीआई को आगे बढ़ाती भी है तो उसपर 'कॉपीकैट' का चस्पा लगेगा और यही कहा जाएगा कि कांग्रेस का विचार आगे बढ़ाने में मोदी सरकार माहिर है.
दिलचस्प बात ये भी है कि 2016-17 की आर्थिक समीक्षा में यूबीआई की बात करते हुए ‘यूनिवर्सल बेसिक इनकमः अ कन्वर्सेशन विद एंड विदइन द महात्मा’ शीर्षक वाला एक पूरा चैप्टर इसमें जोड़ा गया था और याद दिलाया गया था कि अति गरीब लोगों के हितों की रक्षा करना राष्ट्र राज्य की जिम्मेदारी है जिसमें ऐसे कदम लाभदायक होंगे.
कांग्रेस और राहुल गांधी से कुछ सवाल
इसमें कोई दो राय नहीं कि कांग्रेस और राहुल गांधी की झंडाबरदारी में यूनिवर्सल बेसिक इनकम यानी यूबीआई शुरू होती है तो इससे लोगों में अच्छा संकेत जाएगा लेकिन इसे अमली जामा पहनाने का साधन क्या होगा? इस योजना का ढांचा कुछ ऐसा है कि गरीबों के खाते में एक न्यूनतम राशि ट्रांसफर की जाएगी. अब सवाल है कि कांग्रेस जब जनधन खाते और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) जैसी योजनाओं को कोसती रही है, फिर वह यूबीआई को धरातल पर कैसे उतार पाएगी? क्या देश में फिर नए बैंक खाते खोलने के दौर शुरू होंगे, क्या डीबीटी से इतर कोई नया सिस्टम बनेगा? अगर यह सब हो भी जाता है तो उस भ्रष्टाचार पर अंकुश कैसे लगेगा जिसकी चर्चा मनरेगा में होती है. क्या लोग मनरेगा की तरह काम-धाम छोड़ कर खैरात पर निर्भर नहीं होंगे? अगर मुफ्त खाते में पैसे आ जाएं तो बिना मेहनत मजदूरी किए शराब पीने का चलन फिर नहीं बढ़ेगा और महिलाएं जो मजदूरी करती हैं, उनके घर बैठने का सिलसिला शुरू नहीं होगा?