करण जौहर के प्रोडक्शन में बन रही "कलंक" को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह बना हुआ है. आज फिल्म के मेन लीड वरुण धवन और एक्टर आदित्य रॉय कपूर का लुक जारी हुआ है. ये मल्टीस्टारर पीरियड ड्रामा 40 के दशक की कहानी पर आधारित है. फिल्म में वरुण धवन, जफ़र का किरदार निभा रहे हैं. लेकिन एक रिपोर्ट के अनुसार, वरुण का नाम जफर नहीं बल्कि कुछ और रखा गया था जिसे सलमान खान की वजह से उन्होंने बदलवा दिया था.
एक सूत्र के आधार पर सिनेब्लिट्ज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, वरुण को सुल्तान नाम काफी पसंद आया था. लेकिन उन्हें लगा कि बॉलीवुड में केवल एक ही सुल्तान हो सकता है. वो कोई और नहीं सलमान खान ही हैं. वरुण, सलमान की काफी इज्जत करते हैं. उन्होंने मेकर्स से आग्रह किया कि उनके किरदार का नाम बदलकर जफ़र कर दिया जाए.
रिपोर्ट्स के मुताबिक़ मेकर्स वरुण की बात से सहमत हो गए और एक्टर के किरदार का नाम सुल्तान से बदलकर जफ़र कर दिया. बता दें कि कबीर खान की फिल्म "सुल्तान" में रेसलर की भूमिका निभाने के बाद सलमान खान को घर-घर में सुल्तान के तौर पर पहचाना जाने लगा था. इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्डतोड़ कमाई की थी. इसके अलावा सलमान को उनकी सुपरहिट फिल्म दबंग के बाद से ही अक्सर फैंस उन्हें दबंग खान के नाम से भी पुकारते हैं.
वरुण और आलिया की कलंक को साजिद नाडियाडवाला, करण जौहर, हीरु यश जौहर और अपूर्व मेहता प्रोड्यूस कर रहे हैं. करण ने फिल्म को अपने दिल के काफी करीब बताया है. उन्होंने एक पोस्ट के जरिए बताया था कि इस फिल्म की कहानी उनके दिमाग में 15 साल पहले आई थी. उन्होंने ये भी कहा था कि ये वो आखिरी फिल्म थी जिस पर करण के पिता यश जौहर ने काम किया था.
इस मल्टीस्टारर फिल्म में आलिया भट्ट, वरुण धवन, सोनाक्षी सिन्हा, संजय दत्त, कुणाल खेमू, हितेन तेजवानी, माधुरी दीक्षित नेने और आदित्य रॉय कपूर ने अहम भूमिका निभाई है. मूवी अगले महीने 19 अप्रैल को रिलीज होगी. फिल्म का बजट 80 करोड़ के आसपास बताया जा रहा है. फिल्म को अभिषेक वर्मन ने डायरेक्ट किया है.
कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव में पार्टी का जनाधार मजबूत करने के लिए यूपी को 2 हिस्सों में बांटते हुए 2 प्रभारी महासचिवों का ऐलान किया था. जिसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी और पश्चिम उत्तर प्रदेश का जिम्मा ज्योतिरादित्य सिंधिया को सौंपा था. राहुल गांधी ने लखनऊ में कांग्रेस मुख्यालय में इसकी घोषणा करते हुए कहा था कि पार्टी अब यूपी में फ्रंट फुट पर खेलेगी. हमने 2 युवाओं को प्रदेश का जिम्मा दिया है, जिनके सामने लोकसभा चुनाव की चुनौती तो है ही लेकिन इनका असली लक्ष्य 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सत्ता में वापस लाना होगा.
उत्तर प्रदेश की राजनीति पर करीब से नजर रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार शरद प्रधान का कहना है कि सपा-बसपा गठबंधन के बावजूद कांग्रेस के साथ एक गुप्त समझौते की बात सियासी गलियारों में की जा रही थी. वहीं तीन राज्यों में कांग्रेस की जीत से यूपी के मुस्लिम वोट का रुख कांग्रेस की तरफ घूमा. लेकिन इन सबसे बीच पुलवामा हमला और एयर स्ट्राइक हो गई. जिसके बाद बीजेपी इसका राजनीतिक फायदा लेते दिखी, तो वहीं विरोधी दल सुस्त पड़ गए. ऐसे में इन दलों पास एक साथ आने के अलावा कोई चारा नहीं था और यह राजनीतिक रूप से सही भी है.
इससे पहले सपा-बसपा ने गठबंधन का ऐलान करते हुए कांग्रेस पार्टी के लिए महज गांधी परिवार के गढ़ अमेठी और रायबरेली की सीट छोड़ी थी. जिसके बाद कांग्रेस ने अकेले चुनाव का ऐलान कर दिया. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और ज्योंतिरादित्य सिंधिया ने अभी लखनऊ दफ्तर में अपना कार्यभार संभाला ही था कि पुलवामा में बड़ा आतंकी हमला हो गया. पुलवामा हमले के बाद प्रियंका गांधी ने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस स्थगित कर दी तो वहीं कांग्रेस पार्टी ने अपने कई राजनीतिक कार्यक्रम टाल दिए जिसमें गुजरात में होने वाली कार्य समिति की बैठक भी शामिल है.
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